ट्रैवल गाइड, जिन्होंने बनाया दुनिया का नक़्शा

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आज सारी दुनिया छोटे-छोटे गैजेट्स में सिमट कर जेब में आ गई है. दुनिया का कोई भी कोना सिर्फ़ एक क्लिक की दूरी पर है.

आज हम उन रास्तों पर भी बेखौफ़ चल पड़ते हैं जिनका ओर-छोर पता नहीं होता.

हम बेफ़िक्र होते हैं, यह सोच कर कि हमारे पास गूगल मैप है. वो हमें भटकने नहीं देगा.

लेकिन आज से पांच सौ बरस पहले ऐसा नहीं था. ज़रा सोचिए जब लोगों के पास ऐसे संसाधन नहीं थे तब लोग कैसे सफ़र करते होंगे.

जब लोगों को यही नहीं पता होता था कि समंदर कितने हैं, महाद्वीप कितने हैं. अमरीका किधर है. इंडोनेशिया कहां है. उस दौर में भी बहुत से साहसी लोग नाव पर सवार होकर या पैदल ही दुनिया की सैर को निकल पड़ते थे.

आज तो हर जगह का नक़्शा है. गूगल मैप ने दुनिया को क़दमों में नाप कर, समेटकर आप के मोबाइल में डाल दिया है. लेकिन पांच सौ बरस पहले तो दुनिया का ठीक-ठीक नक़्शा भी काग़ज़ पर नहीं उकेरा गया था.

दुनिया का पहला नक़्शा

शुरुआती दौर के नक़्शे दुनिया की आधी-अधूरी तस्वीरें पेश करते थे. उस दौर में नक़्शा बनाने का केंद्र इटली के शहर हुआ करते थे.

इटली और स्पेन के कारोबारी और अन्वेषक पूरे हौसले से दुनिया की खोज को निकलते थे. फिर ये जो जानकारी लेकर लौटते थे, उनके आधार पर नक़्शे बनाए जाते थे. पुराने नक़्शों में सुधार किया जाता था.

यूरोप में दुनिया का पहला नक़्शा 1448 में तैयार किया गया था जो कि ख़ूबसूरत और दिलकश था. इसे वेनिस के मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो ने चमड़े पर तैयार किया था. इसका नाम था प्लेनिस्फ़ेरो.

इस नक़्शे की बुनियाद थे यूनानी-रोमन विद्वान टॉलेमी का भूकेंद्रीय मॉडल, बुत परस्तों के निशान, ईसाइयों की श्रद्धा, अरबी भौगोलिक सिद्धांत और वैज्ञानिक फॉर्मूले शामिल थे. इस नक़्शे में तमाम प्रायद्वीपों को उन्हीं नामों से रेखांकित किया गया है, जिस नाम से उस दौर में यूरोप के लोग इन्हें जानते थे.

नक़्शे में दुनिया के चारों तरफ़ छह दायरे बने हैं, जिनमें छोटे-छोटे नंबर और अक्षर लिखे हैं. इन नंबरों और दायरों से ज़मीन के चारों तरफ़ चांद की चाल, मौसमों और त्यौहारों का चक्र समझाया जाता था.

प्लेनिस्फ़ेरो, लैटिन भाषा का शब्द है. प्लेनस मतलब चपटा और स्फ़ेरस मतलब गोला. मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो के दस्तख़त वाले सिर्फ़ तीन ही नक़्शे आज मौजूद हैं. सबसे पुराना नक़्शा 1442 का है जो इटली के मध्यकालीन शहर वेरोना की बिबलियोटेका कम्यूनेला नाम की लाइब्रेरी में सुरक्षित है. लिआर्दो का आख़िरी मानचित्र 1452 का है, जो अमरीकन ज्योग्राफ़िकल सोसाएटी लाइब्रेरी में है.

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