क्या वाक़ई सेहत के लिए अच्छा होता है : ख़ुद का मूत्र पीना

ख़ुद का मूत्र पीने के बारे में कोई बमुश्किल ही सोच सकता है बशर्ते वह कहीं फंसा न हो या उसकी जान न जा रही हो. हालांकि ऐसे कुछ लोग हैं जो निजी तौर पर अपने घर में इसका इस्तेमाल करते हैं.

उदाहरण के तौर पर केंट, नेविंगटन की 33 वर्षीय योग शिक्षक केली ओकली ने दावा किया था कि ख़ुद का मूत्र पीने से उन्हें अपनी लंबी स्वास्थ्य समस्याओं से निजात मिली थी. उनको हाशिमोटो की थायरॉइड की बीमारी और लंबे दर्द से निजात मिला था.

उन्होंने दो साल पहले समाचार एजेंसी प्रेस एसोसिएशन से कहा था कि उन्होंने अपना मूत्र पीना शुरू किया है. कुछ लोग इसे ‘यूरीन थेरेपी’ कहते हैं, लेकिन इसे यूरोफ़ेजिया कहा जाता है.

वह कहती हैं, “मैंने सुना था कि यह प्रतिरक्षा तंत्र को दोबारा स्थापित करता है, अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और त्वचा के लिए अच्छा होता है. इसलिए मैंने सोचा की इसे आज़माया जाए.”

इसके बाद उन्होंने यह शुरू कर दिया और अब वह न केवल हर दिन एक जार ताज़ा मूत्र पीती हैं बल्कि सूती कपड़े को मूत्र में भिगोकर अपने पूरे चेहरे पर लगाती हैं. उनका दावा है कि इससे उनकी त्वचा ‘चमकदार’ हुई है.

                         

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हैरानी की बात यह है कि केवल केली ही ऐसी शख़्स नहीं हैं जिन्होंने हाल में यूरोफ़ेजिया के लाभ बताए हैं.

वज़न कम करने के लिए पेशाब

बीते हफ़्ते अलबर्टा, कनाडा की 46 वर्षीय लीह सैम्पसन ने ‘द सन’ से कहा था कि अपना मूत्र पीने से शरीर का वज़न कम करने में मदद मिलती है.

लीह कहती हैं कि उनका वज़न 120 किलोग्राम था, वह इसे कम करने के लिए बेकरार थीं. उनको हैरत हुई कि मूत्र इसमें मदद कर सकता है.

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